Editorial Policy
संपादकीय नीति
हम कहानी सुनाते हैं, लेकिन तथ्यों की कीमत पर नहीं।
1. शोध प्रक्रिया
- विषय चुनने के बाद हम प्राथमिक स्रोत (अभिलेख, पुरातात्विक रिपोर्ट, समकालीन वृत्तांत, सरकारी दस्तावेज़) ढूँढते हैं।
- फिर प्रतिष्ठित द्वितीयक स्रोत — इतिहासकारों की पुस्तकें, शोध-पत्र, संग्रहालय और विश्वविद्यालय प्रकाशन।
- जहाँ स्रोतों में मतभेद हो, हम दोनों पक्ष लिखते हैं और बताते हैं कि मतभेद किस बात पर है।
2. तथ्य, अनुमान और परंपरा
हमारे लेखों में हर दावा इनमें से किसी एक श्रेणी में आता है, और हम इसे साफ़ लिखते हैं:
- दर्ज तथ्य — जो प्राथमिक या विश्वसनीय स्रोतों से प्रमाणित है।
- इतिहासकारों का मत / अनुमान — प्रमाण पर आधारित व्याख्या, जिस पर बहस हो सकती है।
- किंवदंती / लोक-मान्यता — जो परंपरा में प्रचलित है, पर दस्तावेज़ी प्रमाण नहीं।
- अप्रमाणित दावा — जो लोकप्रिय है पर हमें कोई ठोस स्रोत नहीं मिला।
3. आस्था से जुड़े विषय
मंदिरों और धार्मिक स्थलों से जुड़ी कहानियों में हम आस्था का सम्मान करते हैं, लेकिन मान्यता को ऐतिहासिक तथ्य की तरह प्रस्तुत नहीं करते।
4. जीवित व्यक्ति
जीवित व्यक्तियों के बारे में हम केवल सार्वजनिक रूप से दर्ज जानकारी (अदालती रिकॉर्ड, आधिकारिक बयान, प्रतिष्ठित समाचार स्रोत) का उपयोग करते हैं और आरोप को आरोप ही लिखते हैं।
5. वीडियो और लेख
हमारी documentaries में नाटकीय प्रस्तुति (संगीत, 2D animation) होती है। लिखित लेख उसी विषय का शोध-आधारित संस्करण है; यदि दोनों में कोई अंतर दिखे तो लेख को अधिक सटीक मानें और हमें सूचित करें।
6. संपादकीय समीक्षा
कोई लेख तब तक “संपादकीय समीक्षा लंबित” चिह्न के साथ प्रकाशित रहता है जब तक हर दावे को स्रोतों से मिलाया न गया हो।
अंतिम अपडेट: 7 अक्टूबर 2026