रहस्य · मंदिरों के रहस्य
जगन्नाथ पुरी रत्न भंडार का सच: ग़ायब चाबी, टूटे 3 ताले और 48 साल बाद 2026 की गिनती
पुरी के जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार 46 साल बाद 14 जुलाई 2024 को खुला — असली चाबी नहीं मिली, तीन ताले तोड़ने पड़े। 1978 की सूची में कितना सोना दर्ज था, 128 किलो या 150 किलो का भ्रम क्या है, साँप और सुरंग की बातों का सच, और 2026 की गोपनीय गिनती में अब तक क्या पता चला।
वीडियो के अध्याय (13)दिखाएँछुपाएँ
- 0:0014 जुलाई 2024, दोपहर 1:28 — तीन ताले और ग़ायब चाबी
- 1:17रत्न भंडार क्या है: बाहर वाला, भीतर वाला, चलंती भंडार
- 3:52हमले और 1568 का कालापहाड़
- 4:57कोहिनूर: रणजीत सिंह की आखिरी इच्छा (1839)
- 6:46पहली सूचियाँ: 1805, 1926, 1952 और मुकुटों का वज़न
- 8:431978 का रजिस्टर: 454 सोने के गहने, 128 किलो या 150 किलो?
- 11:0214 जुलाई 1985: वही तारीख
- 11:512018: चाबियाँ ग़ायब, भूरा लिफ़ाफ़ा और 324 पन्नों की रिपोर्ट
- 14:1714–18 जुलाई 2024: डुप्लीकेट चाबी नहीं लगी, संदूक, साँप?
- 17:08सुरंग का सच: ASI रडार, रत्नवेदी और मरम्मत
- 19:162026 की गिनती: तरीका, गहनों पर सवाल, गोपनीय सूची
- 22:54सुना बेश और दशहरे का कनेक्शन
- 24:12तीनों सवालों के जवाब
मुख्य बातें
- 01रत्न भंडार पुरी के जगन्नाथ मंदिर के जगमोहन के उत्तरी हिस्से से जुड़ा खजाना है। इसके दो कक्ष हैं — बाहर वाला (भीतर का रास्ता इसी से होकर) और भीतर वाला, जो 1978 के बाद 14 जुलाई 2024 तक नहीं खुला।
- 022018 में भीतरी कक्ष की असली चाबी नहीं मिली; बाद में ‘डुप्लीकेट’ चाबियों वाला लिफ़ाफ़ा मिला, पर 14 जुलाई 2024 को वे तीनों तालों में नहीं लगीं और ताले मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में तोड़े गए। असली चाबियाँ कहाँ गईं, यह आज भी सवाल है — चोरी साबित नहीं हुई है।
- 031978 की सूची में 454 सोने और 293 चाँदी की वस्तुएँ दर्ज हैं; सोना लगभग 12,831 भरी। 1 भरी = 11.66 ग्राम मानें तो यह करीब 150 किलो बनता है — ‘128 किलो’ वाला आँकड़ा 1 भरी = 10 ग्राम मानकर निकला है।
- 04ASI के अनुसार सितंबर 2024 के ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार सर्वे में रत्न भंडार में कोई छिपा कक्ष या सुरंग नहीं मिली। स्नेक हेल्पलाइन के अनुसार 2024 में भीतर कोई साँप भी नहीं था।
- 052026 की गिनती 25 मार्च से 1978 की सूची से मिलान करके चल रही है। कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन के अनुसार नई सूची गोपनीय रहेगी और सार्वजनिक नहीं की जाएगी।
विषय-सूची14 भाग
- जगन्नाथ पुरी का रत्न भंडार क्या है और कहाँ है?
- इतना सोना आया कहाँ से?
- 18 हमले और 1568 का कालापहाड़
- क्या कोहिनूर जगन्नाथ का था?
- जगन्नाथ मंदिर का खजाना कितना है? 1805 से 1978 तक की सूचियाँ
- 128 किलो या 150 किलो? भरी का हिसाब
- रत्न भंडार की चाबी कहाँ गई? 2018 का विवाद
- रत्न भंडार कब खुला? 14 से 18 जुलाई 2024
- क्या रत्न भंडार में गुप्त सुरंग है?
- रत्न भंडार में क्या मिला? 2026 की गिनती
- 147 बनाम 118 और ‘तीन गहनों’ का सवाल
- सुना बेश: रत्न भंडार के गहने कब दिखते हैं?
- दर्शन और आज की स्थिति
- आगे क्या: क्या गोपनीय सूची कभी सामने आएगी?
संपादकीय समीक्षा लंबित: इस लेख के तथ्य नीचे दिए स्रोतों पर आधारित हैं, लेकिन अंतिम संपादकीय जाँच अभी बाकी है। कोई गलती दिखे तो हमें बताएँ।
14 जुलाई 2024, रविवार, दोपहर 1 बजकर 28 मिनट। पुरी के जगन्नाथ मंदिर में एक लोहे के दरवाज़े के सामने अधिकारी, पुजारी, इंजीनियर और साँप पकड़ने वाले खड़े थे। चाबियाँ लगाई गईं — पर तीनों में से कोई ताला नहीं खुला। आख़िरकार ताले तोड़े गए, और 46 साल बाद भगवान जगन्नाथ के रत्न भंडार का भीतरी कक्ष खुला।
इस लेख में हम रत्न भंडार की कहानी को तीन हिस्सों में बाँटकर देखेंगे — क्या सरकारी रिकॉर्ड, विधानसभा और अदालत में दर्ज है, क्या सिर्फ़ आरोप या अनुमान है, और क्या आस्था व किंवदंती है। पूरी कहानी देखनी हो तो ऊपर हमारी 25 मिनट की documentary देखें।
जगन्नाथ पुरी का रत्न भंडार क्या है और कहाँ है?
रत्न भंडार यानी भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा और सुदर्शन के गहनों का खजाना। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अनुसार यह मंदिर के जगमोहन (सभा-मंडप) के उत्तरी प्रवेश से जुड़ी, खोंडालाइट पत्थर की बनी संरचना है।
इसके दो मुख्य हिस्से हैं। बाहर वाला कक्ष (बाहार भंडार) — जहाँ त्योहारों पर पहने जाने वाले गहने रहते हैं। भीतर वाला कक्ष (भीतर भंडार) — जहाँ तक पहुँचने के लिए बाहर वाले कक्ष से होकर जाना पड़ता है, और दोनों के बीच एक लोहे का दरवाज़ा है जिस पर बाहर से ताला लगता है। रोज़ की पूजा में काम आने वाले गहनों को अलग से ‘चलंती’ भंडार कहा जाता है।
इतना सोना आया कहाँ से?
मौजूदा मंदिर का निर्माण 12वीं सदी में पूर्वी गंग वंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंग के समय शुरू हुआ माना जाता है। 13वीं सदी में राजा अनंगभीम देव तृतीय ने अपना पूरा राज्य भगवान जगन्नाथ को समर्पित कर ख़ुद को उनका ‘राउत’ (सेवक) कहा। मंदिर-इतिहास मादला पांजी के अनुसार अनंगभीम देव ने ढाई लाख माढ़ा सोना दान किया (1 माढ़ा ≈ 5.83 ग्राम) — यह पांजी की परंपरा है, स्वतंत्र हिसाब उपलब्ध नहीं।
ETV भारत की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार मंदिर के एक द्वार पर लगे अभिलेख में दर्ज है कि 1466 में गजपति राजा कपिलेंद्र देव ने अपनी संपत्ति और गहने — 16 हाथियों पर लादकर — भगवान को अर्पित किए।
18 हमले और 1568 का कालापहाड़
मादला पांजी के अनुसार जगन्नाथ मंदिर पर इतिहास में 18 बार हमले और लूट हुई। ओडिशा सरकार की पत्रिका ‘ओडिशा रिव्यू’ (जुलाई 2011) में इतिहासकार अभिमन्यु दाश ने इन हमलों का ब्योरा दिया है — हालाँकि उनके लेख में अलग-अलग गिने गए हमले 16 तक ही पहुँचते हैं, इसलिए ‘18’ को पांजी की संख्या मानना बेहतर है।
सबसे चर्चित हमला 1568 का है, जब बंगाल के सुल्तान सुलेमान कर्रानी के अफ़ग़ान सेनापति कालापहाड़ ने ओडिशा पर चढ़ाई की। पुजारियों ने विग्रहों को चिलिका झील के एक द्वीप पर छिपा दिया, पर परंपरा के अनुसार कालापहाड़ उन्हें खोजकर गंगा किनारे ले गया और जला दिया। संत बिसर मोहंती ‘ब्रह्म’ (पवित्र तत्व) बचाकर लौटे। ओडिशा रिव्यू के लेख में 1568 के हमले में ख़ज़ाने की लूट का अलग से ज़िक्र नहीं है; लूट का उल्लेख 1610 जैसे बाद के हमलों में आता है।
क्या कोहिनूर जगन्नाथ का था?
पंजाबी यूनिवर्सिटी के ‘एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ सिखिज़्म’ के अनुसार 1839 में महाराजा रणजीत सिंह की अंतिम बीमारी के समय ज्योतिषियों ने सलाह दी कि कोहिनूर हीरा पुरी के जगन्नाथ मंदिर भेजा जाए, और महाराजा की भी यही इच्छा थी। लेकिन शाही ख़ज़ांची बेली राम ने हीरा देने से मना कर दिया — उनका कहना था कि यह महाराजा की निजी नहीं, राज्य की संपत्ति है। रणजीत सिंह की मृत्यु के लगभग दस साल बाद हीरा अंग्रेज़ों के पास चला गया।
जगन्नाथ मंदिर का खजाना कितना है? 1805 से 1978 तक की सूचियाँ
रत्न भंडार की गिनती का इतिहास 200 साल से भी पुराना है। 1805 में अंग्रेज़ कलेक्टर चार्ल्स ग्रोम की रिपोर्ट में लगभग 64 सोने-चाँदी के गहने, 128 सोने के सिक्के और 1,333 तरह के कपड़े दर्ज थे। 1926 की एक सूची पुरी कलेक्ट्रेट में रखी गई। 1952 के ‘रिकॉर्ड ऑफ़ राइट्स’ में बाहर वाले भंडार में 150 सोने के गहने और भीतर वाले भंडार में 180 तरह के गहने व 146 चाँदी की वस्तुएँ दर्ज हुईं। ETV भारत के अनुसार तीनों विग्रहों के सोने के मुकुटों का वज़न लगभग 7.11 किलो, 5 किलो और 3.2 किलो है।
सबसे विस्तृत और आख़िरी पूरी गिनती 1978 में हुई — 15 मई से 23 जुलाई तक, लगभग 70 दिन। उस समय की सूची आज भी हर बहस का आधार है। अप्रैल 2018 में ओडिशा विधानसभा में तत्कालीन कानून मंत्री प्रताप जेना ने लिखित जवाब में बताया कि 1978 में 12,831 भरी से ज़्यादा सोना और 22,153 भरी चाँदी दर्ज हुई थी, 14 वस्तुएँ तौली नहीं जा सकीं, और मंदिर प्रशासन के पास खज़ाने के मूल्य का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
1978 की सूची: रत्न भंडार में क्या दर्ज हुआ (ETV भारत और विधानसभा उत्तर के आधार पर)
भीतर वाला भंडार
- सोने की वस्तुएँ:
- 367
- सोने का वज़न (भरी):
- 4,364
- चाँदी की वस्तुएँ:
- 231
बाहर वाला भंडार (त्योहारों के गहने)
- सोने की वस्तुएँ:
- 79
- सोने का वज़न (भरी):
- 8,175
- चाँदी की वस्तुएँ:
- 39
रोज़ के उपयोग वाले (चलंती)
- सोने की वस्तुएँ:
- 8
- सोने का वज़न (भरी):
- 299
- चाँदी की वस्तुएँ:
- 23
कुल
- सोने की वस्तुएँ:
- 454
- सोने का वज़न (भरी):
- 12,838 (विधानसभा उत्तर: 12,831)
- चाँदी की वस्तुएँ:
- 293 (कुल वज़न 22,153 भरी)
तौली नहीं जा सकीं
- सोने की वस्तुएँ:
- —
- सोने का वज़न (भरी):
- —
- चाँदी की वस्तुएँ:
- 14 वस्तुएँ (सोना-चाँदी मिलाकर)
128 किलो या 150 किलो? भरी का हिसाब
कई ख़बरों में लिखा गया कि 1978 में 128.38 किलो सोना और 221.53 किलो चाँदी मिली थी। लेकिन यही रिपोर्टें 1 भरी = 11.66 ग्राम बताती हैं। अगर 12,838 भरी को 11.66 से गुणा करें तो लगभग 149.7 किलो बनता है, और 22,153 भरी चाँदी लगभग 258 किलो।
यानी ‘जगन्नाथ मंदिर का खजाना कितने करोड़ का है?’ — इसका कोई आधिकारिक जवाब नहीं है। 2026 की गिनती में भी मूल्यांकन नहीं किया जा रहा, सिर्फ़ पहचान, तौल और मिलान हो रहा है। ऐसा ही रहस्य दक्षिण भारत के पद्मनाभस्वामी मंदिर के तहख़ाने B को लेकर भी है।
रत्न भंडार की चाबी कहाँ गई? 2018 का विवाद
4 अप्रैल 2018 को हाई कोर्ट के निर्देश पर 16 सदस्यों की एक टीम ढाँचे की जाँच के लिए रत्न भंडार पहुँची। बाहर वाला कक्ष खुला, पर भीतर वाले कक्ष को सिर्फ़ बाहर से देखा गया — क्योंकि उसकी चाबी नहीं मिली। इससे बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ।
6 जून 2018 को राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस रघुबीर दास की अध्यक्षता में जाँच आयोग बनाया। कुछ ही दिन बाद, 13 जून 2018 को पुरी के तत्कालीन कलेक्टर अरविंद अग्रवाल ने बताया कि ज़िला रिकॉर्ड रूम के एक लॉकर में भूरे रंग का सीलबंद लिफ़ाफ़ा मिला है, जिस पर लिखा था — ‘रत्न भंडार की डुप्लीकेट चाबियाँ’ (Sakshi Post)। विपक्ष ने पूछा — असली चाबियाँ कहाँ हैं?
दास आयोग ने नवंबर 2018 में अपनी 324 पन्नों की रिपोर्ट सरकार को सौंपी (OrissaPOST)। रिपोर्ट सालों तक सार्वजनिक नहीं हुई। फ़रवरी 2026 में ओडिशा हाई कोर्ट की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि यह रिपोर्ट विधानसभा के अगले सत्र में रखी जाए और नई गिनती का 1978 की सूची से मिलान तीन महीने में पूरा हो (PTI/Devdiscourse)।
रत्न भंडार कब खुला? 14 से 18 जुलाई 2024
2024 में ओडिशा में नई सरकार बनने के बाद 4 जुलाई को उड़ीसा हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बिस्वनाथ रथ की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनी। 14 जुलाई 2024 को दोपहर 1:28 बजे भीतरी कक्ष खोला गया। मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाढ़ी के अनुसार ज़िला प्रशासन के पास रखी दो डुप्लीकेट चाबियों से तीनों ताले नहीं खुले, इसलिए SOP के तहत मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में ताले तोड़े गए। सरकार ने इसकी जाँच की बात कही।
18 जुलाई 2024 को सुबह 9:51 बजे भीतरी कक्ष फिर खोला गया और लगभग सात घंटे में सारा सामान मंदिर परिसर के एक अस्थायी स्ट्रॉन्ग रूम में पहुँचा दिया गया। जस्टिस रथ के अनुसार सामान सात पात्रों में था — तीन लकड़ी की अलमारियाँ, दो लकड़ी के संदूक, एक स्टील की अलमारी और एक लोहे का संदूक (The Week/PTI)। उन्होंने यह भी कहा कि भीतर क्या देखा गया, यह गोपनीय रहेगा।
क्या रत्न भंडार में गुप्त सुरंग है?
सोशल मीडिया पर लंबे समय से दावे होते रहे कि भीतरी कक्ष के नीचे सुरंग या छिपे कमरे हैं। 2018 के विधानसभा उत्तर में ‘7 कक्ष, जिनमें 3 उपयोग में’ होने की रिपोर्ट से अटकलें और बढ़ीं। जुलाई 2024 में ही जस्टिस रथ ने मीडिया और सोशल मीडिया से सुरंग और अतिरिक्त कक्षों के बारे में भ्रम न फैलाने की अपील की।
इसके बाद ASI ने 17 दिसंबर 2024 से मरम्मत शुरू की, जो दो चरणों में जुलाई 2025 तक चली। टूटे पत्थर और जंग लगे बीम बदले गए, फ़र्श पर ग्रेनाइट बिछा। ओडिशा के ही एक और रहस्य — कोणार्क सूर्य मंदिर का बंद कक्ष — की कहानी भी ASI के सर्वे और मरम्मत से जुड़ी है।
रत्न भंडार में क्या मिला? 2026 की गिनती
राज्य सरकार की मंज़ूर SOP के तहत गिनती 25 मार्च 2026 से शुरू हुई। बाहर वाले भंडार की गिनती 8 से 11 अप्रैल और भीतर वाले भंडार की 13 अप्रैल से शुरू हुई। टीम में मंदिर के जौहरी, सरकारी बैंकों के जौहरी, RBI से जुड़े अधिकारी और रत्न-विशेषज्ञ हैं। हर गहने की फ़ोटो, वीडियो और 3D मैपिंग हो रही है; सिर्फ़ 1978 की सूची से मिलान होगा, मूल्यांकन नहीं।
147 बनाम 118 और ‘तीन गहनों’ का सवाल
द वीक (27 अप्रैल 2026) की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस रथ की अध्यक्षता वाली निगरानी समिति के दौर में हुई नई गिनती में बाहर वाले भंडार में 147 वस्तुएँ गिनी गईं, जबकि 1978 में वहाँ 118 दर्ज थीं। इस अंतर की आधिकारिक व्याख्या सार्वजनिक नहीं हुई है। इसी दौरान ETV भारत (15 अप्रैल 2026) की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस रथ ने मीडिया से कहा कि बाहर वाले भंडार में तीन गहने नहीं मिले, जिसके बाद श्री जगन्नाथ सेना ने कथित ग़ायबी की जाँच की माँग करते हुए पुरी के सिंहद्वार थाने में शिकायत दी (ETV भारत)।
दूसरी तरफ़, द वीक के अनुसार 20 अप्रैल 2026 को मुख्य प्रशासक अरबिंद पाढ़ी ने कहा कि चलंती और बाहर वाले भंडार की गिनती व 1978 की सूची से मिलान बिना किसी विसंगति के पूरा हुआ। इन दोनों बयानों के बीच की तस्वीर अंतिम रिपोर्ट से ही साफ़ होगी — इसलिए ‘तीन गहने चोरी हुए’ कहना अभी तथ्य नहीं, एक खुला सवाल है।
Organiser के अनुसार 1 सितंबर 2026 (गिनती का 17वाँ दिन) तक भीतर वाले भंडार की छह अलमारियों में से पाँच की गिनती हो चुकी थी और एक बाकी थी। भीतर रखे तीन पुराने लकड़ी के संदूकों को नए संदूकों से बदला जाना है, और गिनती के बाद उनका सामान नए संदूकों में रखा जाएगा (Organiser)।
रत्न भंडार की समय-रेखा
12वीं सदी
अनंतवर्मन चोडगंग के समय मौजूदा मंदिर का निर्माण शुरूदर्ज
13वीं सदी
अनंगभीम देव द्वारा ढाई लाख माढ़ा सोने का दान (मादला पांजी)परंपरा
1466
कपिलेंद्र देव का 16 हाथियों पर लदा दान (मंदिर अभिलेख, ETV भारत के अनुसार)अनुमानित
1568
कालापहाड़ का हमला; विग्रहों को छिपाया गयादर्ज
1839
रणजीत सिंह की कोहिनूर पुरी भेजने की इच्छा, ख़ज़ांची का इनकारदर्ज
1978
आख़िरी पूरी गिनती: 454 सोने, 293 चाँदी की वस्तुएँदर्ज
1985
भीतरी कक्ष खोले जाने की रिपोर्ट; नई गिनती दर्ज नहींअनुमानित
2018
4 अप्रैल को चाबी ग़ायब; 13 जून को ‘डुप्लीकेट चाबी’ का लिफ़ाफ़ा; नवंबर में दास आयोग रिपोर्टदर्ज
2024
14 जुलाई को तीन ताले तोड़कर भीतरी कक्ष खुला; सितंबर में GPR सर्वेदर्ज
2025
मरम्मत पूरी; ASI: कोई छिपा कक्ष नहींदर्ज
2026
25 मार्च से गिनती; सितंबर में मंत्री: नई सूची गोपनीय रहेगीदर्ज
सुना बेश: रत्न भंडार के गहने कब दिखते हैं?
रत्न भंडार के सोने को आम भक्त ‘सुना बेश’ (स्वर्ण वेश) में देखते हैं, जब तीनों विग्रहों को सोने के हाथ, पैर, मुकुट और मालाओं से सजाया जाता है। यह साल में पाँच बार होता है — बाहुड़ा एकादशी (रथ यात्रा के दौरान, रथों पर), दशहरा, कार्तिक पूर्णिमा, पौष पूर्णिमा और दोल पूर्णिमा। मंदिर सूत्रों के अनुसार यह परंपरा 1460 में गजपति कपिलेंद्र देव ने शुरू की।
2026 में रथ यात्रा वाला सुना बेश 25 जुलाई को हुआ। पंचांग के अनुसार इस साल विजयादशमी (दशहरा) 20 अक्टूबर 2026 को है, और दशहरा पर मंदिर के भीतर सुना बेश की परंपरा है — सटीक समय के लिए श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की घोषणा देखें। सितंबर 2026 में मंदिर समिति ने सुना बेश के लिए गहनों का नया सेट बनवाने का प्रस्ताव मंज़ूर किया।
दर्शन और आज की स्थिति
- रत्न भंडार आम दर्शन के लिए खुला नहीं है। गिनती के दौरान भी रोज़ के अनुष्ठान और भक्तों का दर्शन जारी रहा।
- सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार मंदिर के भीतर केवल हिंदू श्रद्धालु ही जा सकते हैं — सिंहद्वार पर ‘Only Hindus are allowed’ लिखा है, और विदेशी नागरिकों को भी भीतर जाने की अनुमति नहीं है। भगवान को ‘पतितपावन’ कहा जाता है, इसलिए जो भीतर नहीं जा सकते वे सिंहद्वार पर पतितपावन के दर्शन करते हैं। इस नियम पर समय-समय पर बहस भी होती रही है।
- पुरी आएँ तो कोणार्क (लगभग 35 किमी) भी देखा जा सकता है। मंदिरों के और रहस्य हमारे मंदिर रहस्य सेक्शन में पढ़ें।
आगे क्या: क्या गोपनीय सूची कभी सामने आएगी?
11 सितंबर 2026 को कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा कि रत्न भंडार की गिनती की रिपोर्ट गोपनीय रहेगी और सार्वजनिक नहीं की जाएगी। गिनती पूरी होने पर 1978 के आधार पर नई सूची बनेगी। OdishaBytes की रिपोर्ट के अनुसार काम दुर्गा पूजा के बाद भी जारी रहेगा और ओड़िया माह मार्गशिर तक पूरा होने की संभावना है।
यानी 147 बनाम 118 का अंतर, ‘तीन गहनों’ का सवाल, भीतर वाले भंडार की बाकी गिनती और असली चाबियाँ कहाँ गईं — इनके पक्के जवाब अभी आने बाकी हैं। सरकारी खज़ाना-खोज का एक और चर्चित मामला है जयगढ़ किले की 1976 की तलाशी।
रत्न भंडार: क्या दर्ज है और क्या कथा है
2018 में भीतरी कक्ष की चाबी नहीं मिली
- स्थिति:
- दर्ज
- आधार:
- सरकार, कलेक्टर और दास आयोग
चाबियाँ चोरी हुईं
- स्थिति:
- आरोप, साबित नहीं
- आधार:
- राजनीतिक बयान; कोई अदालती निष्कर्ष नहीं
1978 में 128 किलो सोना
- स्थिति:
- भ्रामक
- आधार:
- 11.66 ग्राम/भरी से लगभग 150 किलो
खज़ाने की रखवाली साँप करते हैं
- स्थिति:
- किंवदंती
- आधार:
- 2024 में कोई साँप नहीं मिला
नीचे गुप्त सुरंग है
- स्थिति:
- अप्रमाणित
- आधार:
- ASI का GPR सर्वे: कोई छिपी जगह नहीं
कोहिनूर जगन्नाथ का है
- स्थिति:
- विवादित दावा
- आधार:
- रणजीत सिंह की इच्छा दर्ज, हीरा कभी पुरी नहीं पहुँचा
2026 में तीन गहने ग़ायब
- स्थिति:
- खुला सवाल
- आधार:
- जस्टिस रथ का बयान (ETV भारत) बनाम पाढ़ी का ‘कोई विसंगति नहीं’ वाला बयान (द वीक)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जगन्नाथ पुरी का रत्न भंडार कब खुला?
भीतरी कक्ष 14 जुलाई 2024 को दोपहर 1:28 बजे, 1978 के बाद पहली बार गिनती के उद्देश्य से खोला गया। चाबियाँ नहीं लगीं, इसलिए तीन ताले तोड़े गए। 2026 में 25 मार्च से नई गिनती शुरू हुई।
जगन्नाथ मंदिर का खजाना कितना है?
1978 की सूची में 454 सोने और 293 चाँदी की वस्तुएँ दर्ज हैं — सोना लगभग 12,831 भरी (करीब 150 किलो) और चाँदी 22,153 भरी (करीब 258 किलो)। खज़ाने का कोई आधिकारिक मूल्यांकन नहीं हुआ है।
रत्न भंडार की चाबी कहाँ गई?
4 अप्रैल 2018 को असली चाबी नहीं मिली। 13 जून 2018 को ज़िला रिकॉर्ड रूम में ‘डुप्लीकेट चाबियों’ का लिफ़ाफ़ा मिला, पर 2024 में वे ताले नहीं खोल पाईं। असली चाबियाँ कहाँ हैं, यह आज तक सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
रत्न भंडार में क्या मिला?
मुख्य प्रशासक के अनुसार चलंती और बाहर वाले भंडार का मिलान 1978 की सूची से बिना विसंगति के हुआ, हालाँकि बाहर वाले भंडार में 147 बनाम 118 वस्तुओं और तीन गहनों को लेकर सवाल उठे। अंतिम सूची गोपनीय रखी जाएगी।
क्या रत्न भंडार में सुरंग है?
नहीं। ASI के सितंबर 2024 के ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार सर्वे में कोई छिपा कक्ष या सुरंग नहीं मिली, यह ASI ने जुलाई 2025 में बताया।
सुना बेश साल में कितनी बार होता है?
साल में पाँच बार — बाहुड़ा एकादशी (रथों पर), दशहरा, कार्तिक पूर्णिमा, पौष पूर्णिमा और दोल पूर्णिमा। इसमें रत्न भंडार के सोने के गहनों से विग्रहों को सजाया जाता है।
स्रोत और संदर्भ
इस लेख में उपयोग किए गए प्राथमिक और द्वितीयक स्रोत। हम कोई काल्पनिक संदर्भ नहीं देते।
- [1]
Puri Jagannath Temple's Ratna Bhandar: Here's All You Need To Know
ETV Bharat, जुलाई 2024 — 1805/1926/1952/1978 की सूचियाँ, भरी का हिसाब, मादला पांजी और कपिलेंद्र देव का दान
संस्था
- [2]
No estimate of Ratnabhandar valuables with SJTA: Minister
OrissaPOST, 26 अप्रैल 2018 — विधानसभा में कानून मंत्री प्रताप जेना का लिखित उत्तर
सरकारी अभिलेख
- [3]
Invasions on the Temple of Lord Jagannath, Puri — Abhimanyu Dash
Orissa Review, ओडिशा सरकार, जुलाई 2011
सरकारी अभिलेख
- [4]
The Encyclopaedia of Sikhism, पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला — रणजीत सिंह और कोहिनूर
विश्वविद्यालय
- [5]
Odisha to probe why duplicate keys failed to open Jagannath temple Ratna Bhandar locks
Deccan Herald (PTI), 16 जुलाई 2024 — तीन ताले, दास आयोग
संस्था
- [6]
No hidden chamber in Puri Jagannath temple's Ratna Bhandar: ASI
The Week (PTI), 29 जुलाई 2025 — GPR सर्वे और मरम्मत का ब्योरा
पुरातात्विक रिपोर्ट
- [7]
Puri Ratna Bhandar row: A lingering political storm in Odisha?
The Week, 27 अप्रैल 2026 — 147 बनाम 118, 2026 की गिनती
संस्था
- [8]
Puri Jagannath Temple Ratna Bhandar Inventory List To Remain Confidential: Minister
OdishaBytes, 11 सितंबर 2026
संस्था
- [9]
46 years on, Puri treasure trove opened, ornaments relocated
The Tribune, 14 जुलाई 2024 — 1:28 बजे खुलना, मजिस्ट्रेट के सामने तीन ताले तोड़े गए, जस्टिस रथ समिति
संस्था
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